आंवले का औषधीय महत्व

आंवले का औषधीय महत्व



आंवले का औषधीय महत्व
आंबला 


1. कब्ज को ठीक करने में =रात को सोते समय दो या तीन माँसा सूखे आंवले का चूर्ण दूध में मिलाकर पिएँ। प्रातः काल खुल कर पेट साफ हो जाता है। 


2. भूक न लगना = सूखे आंवलों का चूर्ण पानी के साथ लेने से खूब भूक लगती है। 


3. सर चकराना =गर्मिओं में जी घवराता है, चक्कर आते  है तो आंवले का शर्वत पीओ। 


4. शक्ति के लिए =सूखे आंवले के चूर्ण 6 ग्राम चूर्ण रोज गाये के दूध के साथ खाने से मर्द का वीर्य अधिक शक्तिशाली बनता है। शरीर में शक्ति आ जाती है और रक्त शुद्धी होती है तथा सभी वीर्य विकार जैसे स्वप्नदोष ,शीघ्रपतन आदि का शमन होता है। 


5. पेट और दाँतों के छाले के लिए =ताजे आंवले के रस को शहद के साथ कुछ दिन तक सेवन करने से पेट और दांतो के छाले में आराम मिलता है। 


6. बलगम के लिए =सूखा आंवला का उपयोग  दो माँसा ,मुलेठी दो माँसा बारीक करके दिन में दो बार पानी के साथ पीने से बलगम में आराम मिलता है। 


7. योनि दोष =आंवला वृक्ष की छाल को 24 घंटे तक पानी में भिगोकर रखे। उसके पानी को छानकर योनि को रोज उसी से धोये तो योनि टाइट हो जाती है। 


8. दिल की धड़कन =जिन लोगो का दिल बहुत धड़कता हो तो 50 ग्राम आंवले के मुरब्बे  पर चंडी की बर्फ चढ़ा कर सुबह कुछ खाए बिना वासे मुँह 20 दिन तक खाने से दिल की धड़कन समान्य हो जाती है।