नीम के उपयोग

नीम के उपयोग 

नीम के उपयोग
नीम

1.नीम के उपयोग = ज्वर में 

  • नीम की सींके एक तोला ,काली मिर्च ७ नग दोनों को पीसकर पानी के साथ पीने से सब प्रकार का ज्वर दूर होता है। 
  • नीम पत्र    के दो तोले रस को गर्म लोहे से छोंककर पीने से ज्वर नष्ट हो जाता है। 
  • नीम के फल की गिरी ,सफ़ेद जीरा ,पीपल ये सब चीजें समान भाग में लेकर करेले के रस में २४ घंटे खरल करके सुखा लें। सूख जाने पर पुनः करेले के रस में घोंटकर एवं सुखाकर कपड़े में छानकर रख लें। इस चूर्ण को ज्वर में सलाई द्वारा सुरमे की तरह आँखों में आंजने से ज्वर उतर जाता है। 

2.नीम के उपयोग = मलेरिया में 

  • नीम की पत्तियां १ तोला ,भुनी हुई फिटकरी ६  माशा   दोनों  चीजों को पीसकर डेढ़ -डेढ़ रत्ती की गोलियां बना लें। ज्वर आने के दो घंटे बाद एक गोली ,फिर एक घंटे बाद एक गोली खाने से मलेरिआ रुक जाता है। 
  • नीम के कोपल ६ तोले, श्वेताभस्म ३  तोले दोनों चीजों को खरल कर ३-३ रत्ती की गोलियां बना लें। एक गोली मिश्री अथवा शीतल जल के साथ देने से मलेरिया ज्वर शर्तियां दूर हो जाता है। 


3.नीम के उपयोग = आतप ज्वर में 

  • ५ तोले  नीम के पचांग का क्वाथ ,दो तोले मिश्री मिलाकर पीने से लू लगने से आया हुआ ज्वर दूर हो जाता है।       
4.नीम के उपयोग = हैजा में 

  • नीम की सींके ५   ,इलायची बड़ी १ , लॉन्ग  ५ ,नारियल की जाता की भस्म २ रत्ती। सब चीजें एक छटांक जल में बारीक पीसकर थोड़ा गर्म कर लें। दो -दो घंटे के अंतर से उपर्युक्त औषधी पीने से हैजा में बहुत लाभ मिलता है। 
  • हैजा में पेशाव  उतराने के लिए  नीम के फूलों को पानी में पीसकर पेडू पर रखना चाहिए।   

5.नीम के उपयोग = जुकाम में 

  • नीम की पत्तियां एक तोला ,काली मिर्च ६ माशे। दोनों चीजें नीम के डंडे से बारीक घोंटकर चने बराबर गोलियाँ बनाकर छाया में सूखा लें। गर्म जल के साथ तीन -चार गोलियां खाने से जुकाम दूर हो जाता है।      
6.नीम के उपयोग = प्लेग में 

  • प्लेग के दिनों में   तेल लगाने से तथा नीम की पत्तियों की धूनी देने से प्लेग में रक्षा होती है। 
  • प्लेग में नीम की पत्तियां और काली मिर्च पीसकर पीना अत्यंत हितकारी होता है।     
7.नीम के उपयोग = वमन में 

  • नीम की सींके ७ नग गर्म रख में भुलभुला कर ,२ बड़ी इलाइची और ५ काली मिर्च बारीक़ पीसकर ,आधी छटांक पानी  के  साथ पीने से वमन होना बंद हो जाता है।    

8. नीम के उपयोग =अम्लपित्त में 

  • सोंठ ,काली मिर्च और नीम की छाल तीनों का चूर्ण कर ,एक तोला चूर्ण नित्य प्रातःकाल सेवन करना अम्लपित्त में अतिशय हितकारी है।     

9.नीम के उपयोग = हिचकी में 

  • नीम की दो सींके एक तोला पानी में पीसकर मोरपंख का जलाया हुआ चंदा एक रत्ती मिलाकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।      

10. नीम के उपयोग =उदर कृमि को नस्ट करने  में 

  • नीम की पत्तियों का स्वरस शहद में मिलाकर चाटने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाता है। 
  • नीम की पत्तियां हींग के साथ खाने से अथवा नीम की पत्तियां काली मिर्च के साथ सुबह के वक्त खाने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते है। 
  • नीम के फूल पीसकर नाभि के नीचे लेप करने से  कीड़े मर जाते है।       
11. नीम के उपयोग =अधिक दस्त आने पर 

  • नीम की पत्तियों को पीसकर छानकर शक्कर मिलाकर पीने से दस्त बंद हो जाते है।       
12.नीम के उपयोग = पेचिस में 


  • नीम की अन्तरछाल तवे में रखकर नीचे आग जलाकर भून लें और पीसकर चूर्ण कर लें। एक टोला चूर्ण दही के साथ खाने से पेचिस दूर हो जाती है।        
13. नीम के उपयोग =बबासीर में 

  • नित्य प्रतिदिन नीम का ५ बूँद तेल खाना और मस्सों पर लगाना बबासीर में हितकारी होता है। 
  • नीम की अन्तरछाल ३  माशे और गुड़  ६   माशे मिलाकर नित्य सेवन करने से बबासीर में लाभ होता है। 
  • रक्तार्श (खूनी बबासीर ) में रक्तस्त्राव को रोकने के लिए प्रातःकाल ३-४ नीम की  निबोलियों का सेवन करना महर्षिदयान्द का अचूक और अनुभूत योग है। 

14.नीम के उपयोग = प्लीहा में 

  • नीम की मींगी ,अजवायन ,नौसादर तीनों समान भाग कर लें। नित्य प्रतिदिन ३ माशे चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से प्लीहा रोग नस्ट हो जाता है       

15. नीम के उपयोग = मसूरिका(चेचक ) में 

  • नीम की दो सींके एक तोला जल के साथ पीसकर तीन दिन बच्चे को पिलाने से चेचक नहीं निकलती। कदाचित निकल भी जाये तो बहुत ज़ोर नहीं करती। 
  • नीम की पत्तियाँ ,खेर की छाल ,सिरस की छाल ,गूलर की छाल सबको पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से बहुत लाभ होता है। 
  • नीम के बीज ,हल्दी ,बहेड़े की मींगी समान भाग में लेकर ठन्डे पानी में घोंटकर ,सुबह -शाम पिलाने से चेचक निकलने की आशंका नहीं रहती है।      

16.  नीम के उपयोग =गठिया रोग में 

  • नीम की कोमल पत्तियाँ ,स्वर्णक्षीरी का पचांग ,सम्भालू के पत्ते ,अमरबेल काली मकोय के पत्ते सबको पीसकर गोमूत्र में पकायें। पक जाने पर छानकर गठिया बाले स्थान पर मलने से अत्यंत लाभ होता है।       

17.नीम के उपयोग = खांसी दमा में 

  • नीम की  पत्तियां , सांभर नमक ,सूखी भांग ,अडूसा ,कच्चा चना ५-५ तोला  लेकर कूट पीसकर टिकिया बना लें और एक मिटटी के बर्तन में बंद कर ,मिट्टी लपेटकर दस सेर जंगली कण्डों की आग में फूंक दें। ठंडा हो जाने पर उसे पीस लें और शीशी में रखें। इनमे से डेढ़ रत्ती दबा सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से श्वासकास,बलगमी खांसी और दमा में लाभ मिलता है।      
18.नीम के उपयोग = पथरी में 

  • १२ तोले नीम की पत्तिओं को पीसकर दो सेर जल में औटाएं ,एक चौथाई पानी रह जाने पर उतारकर उसका बफारा लेने से इन्द्रीय से पथरी गिर जाती है।       
19. नीम के उपयोग =फील पांव में 
  •  नीम की छाल एक तोला ,खैरसार एक टोला दोनों चीजों को एक छटांक गोमूत्र में पीसकर ,६ माशे शहद मिलाकर पीने से फीलपांव दूर हो जाता है। 

20.नीम के उपयोग = प्रमेह में 

  • नीम की पत्तिओं के २ तोले रस में एक तोला मिश्री मिलाकर नित्य पीने से प्रमेह अच्छा हो जाता है। 
  • हल्दिया प्रमेह में नीम की छाल का रस शहद मिलाकर पीने से हल्दिया प्रमेह दूर होता है।     

21.नीम के उपयोग = सिक्तामेह  और मधुमेह 

  • नीम की छाल का काढ़ा पिलाने से सिक्तामेह और मधुमेह में आराम होता है।       
22.नीम के उपयोग = रक्तस्त्राव और प्रदर 

  • नीम की छाल के रस में सफ़ेद जीरा मिलाकर पीने से रक्तस्त्राव और प्रदर रोग दूर होता है। 
  • नीम का तेल गाय के दूध में मिलाकर पीने से प्रदर रोग में आराम होता है।       
23.नीम के उपयोग = वीर्यपात रोकने में 

  • नीम की दो तोले पत्तियां पीसकर टिकिया बनाकर गाय के ४ तोले घी में डालकर पकाएं। इस प्रकार सिद्ध किये हुए घी का नित्य सेवन करने से वीर्यपात होना  बंद हो जाता है।       
24.नीम के उपयोग = वृद्धवस्था में शक्ति के लिए 

  • नीम के फूल ,फल और पत्तियां ,गोंद ,छाल ,त्रिफला ,काला जीरा ,सेंधा नमक,सांभर नमक ,छोटी पीपल ,नीलकण्ठी की पत्ती प्रत्येक चीज ४-४ तोले लेकर ,अडूसा की पत्तियों में खरल करके ३६० गोलियाँ बना लें। नित्य प्रातःकाल एक गोली जल के साथ लेने युवावस्था के समान बल का संचार होता है। नमक ,दूध ,खटाई से परहेज रखें।      
25.नीम के उपयोग = शीघ्र प्रसव 

  • नीम की जड़ स्त्री की कटि  में बांधने से प्रसव शीघ्र हो जाता है। प्रसव हो जाने पर जड़ को खोल देना चाहिए।       
26. नीम के उपयोग =योनि रोग में 

  • निबोली और अरंड के बीज का गूदा नीम की पत्तिओं के रस में पीसकर लेप करने से योनि की पीड़ा दूर हो जाती है। 
  • नीम की निबोलिओं नीम के रस में पीसकर योनि में रखने से या लेप करने से योनि शूल दूर हो जाता है। 
  • योनि से दुर्गन्ध आती है हो तो नीम की पत्तियाँ ,अडूसा ,बच ,कड़बे परबल ,प्रियंगु के फूल इन सबका चूर्ण बनाकर योनि में रखना चाहिए। पहले अमलतास के काढ़े से योनि को धोना अधिक गुणकारी होगा।       

27.नीम के उपयोग=रुधिर विकार में 


  • नित्य प्रतिदिन नीम की पकी निबोलियाँ खाने से  रुधिर विकार ,मंदाग्नि और पित्त प्रकोप दूर होते है। 
  • नित्य ५ बूँद नीम का तेल बताशा या ताजे पानी के साथ रक्त विकार नष्ट हो जाता है।      

28. नीम के उपयोग=खुजली में 


  • खुजली में नीम का तेल लगाना अत्यंत हितकारी होता है।      
29. नीम के उपयोग=दाद के उपचार में 


  • बड़ी नीम(बकायन ) का तेल  लगाने से दाद शीघ्र ही ठीक हो जाती है।      

30.नीम के उपयोग= श्वेतकुष्ठ में 


  • नीम के मद का आरक खिचबाकर सुबह -शाम ढाई -ढाई तोले पीने से श्वेतकुष्ठ तथा अन्य रक्त विकार दूर होते है। 
  • सफ़ेद दागों में लगातार कुछ दिन नीम का तेल लगाने से लाभ मिलता है।     

31.नीम के उपयोग= गर्मी के फोड़े -फुंसी के उपचार में 


  • नीम की छल को घिसकर फोड़े पर लगाने से साधारण फोड़े -फुंसियां ठीक हो जाती है।      

32. नीम के उपयोग=फोड़ों के उपचार में 


  • नीम की पत्तियां डालकर उबाले हुए पानी से फोड़ा धोना बहुत लाभदायक होता है। 
  • नीम की  पत्तिओं का रस ,भांगरे का रस ,सेम की पत्तिओं का रस एक-एक छटांक ,बबूल की पत्तिओं का रस दोनों डेढ़ -डेढ़ छटांक और सरसों का तेल १ कि. ग्रा.  सब चीजें मिलाकर एक लीटर पानी में पकायें। केवल तेल रह जाने पर उतर कर छान लें और ऊपर से  आधा पाव  मोम पिघला कर डाल  दें। इस मरहम के लगाने से भयंकर फोड़ा भी सूखकर ठीक हो जाता है।